नई शिक्षा नीति 2022 । new education policy 2022 | नई शिक्षा नीति कब लागु होगी ।

नई शिक्षा नीति क्या है?  नई शिक्षा नीति कब लागु होगी ।


भारत देश में केंद्र सरकार द्वारा एक नई शिक्षा रणनीति को हरी झंडी दिखाई गई। भारत की लगभग 34 वर्ष बाद एक नई शिक्षा रणनीति को केंद्र सरकार ने बुधवार के दिन मंजूरी दि है।
भारत सरकार द्वारा 34 साल बात आई नई शिक्षा रणनीति मैं स्कूल शिक्षा उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा में कई बदलाव किया गए है।



केंद्रीय मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर और श्री रमेश पोखरियाल ने घोषणा करते हुए कहा है कि सभी स्कूली शिक्षा एवं उच्च शिक्षा तकनीकी शिक्षा संस्थानों के लिए एक एक ही नियम लागू होंगे एवं एनफील को खत्म किया जाएगा। 

34 साल बाद हुए बदलाव में एक नई रणनीति देखने को मिली है। इसमें उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री अमित खरे ने कहा है, कि जो नई शिक्षा नीति बनाई गई है ,उसमें डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी मंच (NETF) बनाए जाएंगे एवं जो भी पाठ्यक्रम होते हैं ,उसे भी शुरू के 8 क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई जाएंगे एवं वर्चुअल लैब भी लगाई जाएगी। 

केंद्र सरकार ने नई शिक्षा रणनीति के तहत जो बदलाव किए हैं उसके स्वरूप को बदलने के लिए लाखों शिक्षकों की आवश्यकता होगी।

भारत में कुल 15 लाख से ज्यादा स्कूल 1000 से ज्यादा विश्वविद्यालय एवं 41 हजार से ज्यादा कॉलेजेस उपलब्ध है. जिसमें हमने निजी कॉलेज क्यों स्कूल को छोड़कर यह आंकड़ा बताया है। 

कुल 35 करोड़ से ज्यादा विद्यार्थियों के लिए एक करोड़ से अधिक शिक्षक उपलब्ध है।


                                     New Education Policy 2020 Highlights: School and higher education ...

आइए जो केंद्र सरकार ने नई रणनीति को मंजूरी दी है उसके तहत क्या-क्या बदलाव किए जाएंगे उसके बारे में जानते हैं



नई शिक्षा नीति 2020 कब और कैसे लागू होगी :

केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी तो दे दी है। लेकिन इसको पूरी तरह से लागू होने में महज 2040 का टारगेट रखा है। अगले दो-तीन वर्षों में हमें कुछ बदलाव देखने को मिल सकते है। लेकिन इस रणनीति को पूरी तरह से भारत की शिक्षा नीति पर बदलाव आने के लिए 2040 का टारगेट रखा गया है। 


बोर्ड के परीक्षा में क्या बदलाव होगी :- 

10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा में बड़े बदलाव किए गए  हैं। नई शिक्षा नीति के तहत कई नियम बोर्ड की परीक्षाओं के भी लागू होते हैं। लेकिन यहां अगले दो या 3 वर्षों में हमें देखने को मिलेंगे। बोर्ड की परीक्षा अब वर्ष में दो बार करवाई जाएगी।  शिक्षा नीति का यह बदलाव इसलिए किया गया क्योंकि विद्यार्थी पर किसी भी प्रकार का बोर्ड परीक्षाओं से लेकर कोई दबाव ना हो. 

वह बिना किसी दबाव के परीक्षा दे सके। केंद्र सरकार ने कहा कि शिक्षा रणनीति को इतना मजबूत किया जाएगा कि उत्तीर्ण  होने के लिए किसी भी प्रकार की एक्स्ट्रा कोचिंग की जरूरत विद्यार्थी को नहीं पड़ेगी। 


कैसे होगी बोर्ड की परीक्षा :-

कब तक हम जिस शिक्षा नीति के तहत पढ़ रहे थे वह 10+2 का था लेकिन नहीं शिक्षा रणनीति के तहत इसमें भी बदलाव देखने को मिला है। अब जो नई शिक्षा नीति के तहत जो शिक्षा प्रणाली है. उसमें 5+3+3+4 की बात की गई है। बोर्ड परीक्षार्थियों को अब दो हिस्सों मैं पेपर देने की चॉइस रहेगी। जिसमें वस्तुनिष्ठ एवं व्याख्यात्मक श्रेणी में विभाजित किया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि विद्यार्थी रटने के बजाय कांसेप्ट को समझने पर ज्यादा ध्यान दें। 


नर्सरी के लिए क्या बदलाव है:-

नई शिक्षा रणनीति के तहत जो फार्मूला अब है वहां 5+3+3+4 का है।  नई शिक्षा नीति के तहत नर्सरी के विद्यार्थियों के लिए भी कई बदलाव किए गए हैं। लेकिन नर्सरी बच्चों के लिए जो बदलाव किए गए हैं अभी लागू नहीं किए जाएंगे। अभी जिस तरह से नर्सरी नीति चल रही है ,उसी प्रकार से चलेगी। जो नीति आगे लागू होगी उसके तहत प्ले स्कूल के जो शुरुआती साल होते हैं उसे भी अब स्कूली शिक्षा में जोड़ दिया जाएगा। यह बदलाव सबसे अहम बदलाव है। 


2022 में कॉलेज के न्यू स्टूडेंट के लिए क्या बदलाव:-

केंद्र सरकार द्वारा उच्च शिक्षा नीति में भी कई बदलाव किए गए हैं। लेकिन जैसा कि मैं बार-बार कह रहा हूं कि जो बदलाव किए गए हैं वह बदलाव तीन-चार साल में कुछ देखे जाएंगे। लेकिन इसको पूरी तरह से लागू होने में 2040 का टारगेट रखा गया है. लेकिन नए विद्यार्थियों में उनके लिए पुरानी रणनीति के हिसाब से ही दाखिल हो पाएंगे। जब तक कि नई रणनीति पूरी तरह से लागू नहीं हो जाती। लेकिन जो उच्च शिक्षा के लिए रणनीति बनाई गई है. उसमें ग्रेजुएशन के 4 साल विद्यार्थी को पढ़ना होगा। उसमें उन्हें ग्रेजुएशन कोर्स को बीच में छोड़ने की भी गुंजाइश होगी। अगर विद्यार्थी ग्रेजुएशन को बीच से छोड़ देता है ,तो उसके सर्टिफिकेट पर ड्रॉपडाउन का थप्पा नहीं होगा। 


ग्रेजुएशन कोर्स को बीच में से छोड़ने पर क्या होगा:-

अगर विद्यार्थी ग्रेजुएशन कोर्स को 1 साल के भीतर छोड़ता है ,तो उसे स्नातकोत्तर का सर्टिफिकेट दिया जाएगा ,अगर कोई विद्यार्थी इंजीनियरिंग कोर्स को 2 साल के बाद छोड़ता है तो उसे डिप्लोमा का सर्टिफिकेट दिया जाएगा ,अगर कोई विद्यार्थी 4 साल के डिग्री कोर्स को 1 साल में छोड़ देता है ,तो उसे नॉर्मल सर्टिफिकेट दिया जाएगा ,अगर विद्यार्थी 2 साल के भीतर छोड़ता है ,तो उसे एडवांस सर्टिफिकेट दिया जाएगा ,और अगर तीसरे साल में विद्यार्थी कोर्स को छोड़ता है तो उसे डिग्री मिलेगी, और अगर विद्यार्थी पूरा कोर्स पड़ता है 4 साल का तो उसे डिग्री को पूरे शोध के साथ दी जाएगी। इसी तरह पोस्ट ग्रेजुएट में भी विकल्प दिए गए हैं। 

जो विद्यार्थी 3 साल का डिग्री कोर्स करके मास्टर करना चाहता है। तो उसके लिए 2 साल का मास्टर्स होगा। 4 साल के डिग्री कोर्स को करने वाले विद्यार्थियों के लिए 1 साल में होगा।  5 साल का इंटीग्रेटेड प्रोग्राम होगा जिसमें स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों एक साथ हो जायेगा।


भारत में पूरे 34 वर्ष के बाद शिक्षा विभाग एवं केंद्र सरकार के द्वारा शिक्षक की कई नीतियों में बदलाव किए गए हैं। जिसमें बहुत से आश्चर्यजनक बदलाव भी है ,एवं बहुत से बदलाव के कारण शिक्षा विभाग की स्थिति को बदलने में एवं शिक्षा के स्तर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए काफी है।  इस पूरे बदलाव को भारत की शिक्षा रणनीति में लागू होने के लिए केंद्र सरकार ने 2040 तक का टारगेट रखा है। लेकिन अगले दो-तीन वर्षों में हमें कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 

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