Makar Sankranti 2023 Date: जानिए मकर संक्रांति कब है और क्यों मनाई जाती है? | मकर संक्रांति का महत्व, तिथि, शुभ मुहूर्त,

Makar Sankranti 2023 : मकर संक्रांति भारत का एक महत्वपूर्ण पर्व है जो भारत के अलावा नेपाल और भी कई देशों में मनाया जाता है इसके बारे में पूरी जानकारी हम आपको बताते हैं-

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क्या है मकर संक्रांति :

मकर संक्रांति भारत का एक प्रमुख पर्व है जो पूरे भारत और नेपाल में मनाया जाता है, पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है, तब इस पर्व को मनाया जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है। 

तमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में मनाते हैं, जबकि कर्नाटक केरल तथा आंध्र प्रदेश में से केवल संक्रांत कहते हैं, कहीं-कहीं इस पर्व को उत्तरायण भी कहते हैं,  इसे एसा इसलिए कहते हैं क्योंकि पृथ्वी का झुकाव हर 6-6 माह तक निरंतर उत्तर दिशा और छह माह दक्षिण दिशा की ओर बदलता रहता है। 


मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त (Makar Sankranti 2023 Date):

Makar Sankranti 2023 Date : हिन्दू पंचांग के अनूसार 15 जनवरी 2023 , दिन रविवार  


मरक संक्रांति के दिन क्या करते है?

इस दिन लोगों द्वारा घरों में गुड़ और तिल के लड्डू बनाए जाते हैं साथ ही इस दिन पतंग को उड़ाना भी बहुत शुभ माना जाता है, कहीं-कहीं बड़ी-बड़ी प्रतियोगिताएं आयोजित होती है, सनातन धर्म के महत्वपूर्ण पर्व में से एक यह मकर संक्रांति हैं।  


मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने का महत्व :

इस पर्व पर पतंग उड़ाने परंपरा की शुरुआत श्रीराम ने की थी, ऐसा उल्लेख मिलता है कि भगवान श्रीराम ने जो पतंग उड़ाई थी, वह इंद्रलोक में चली गई थी, इसके बाद से आज भी इस परंपरा को निभाई जाती है। 


मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व :

वैज्ञानिक दृष्टिकोण की बात करें तो पतंग उड़ाने से हमारा शरीर स्वस्थ रहता है, दिमाग और दिल का संतुलन बना रहता है, पतंग को धूप में उड़ाया जाता है, जिससे हमारे शरीर को विटामिन-डी की भरपूर मात्रा मिलती है और ठंड में विटामिन डी हमारे लिए काफी अच्छा है। 

मकर संक्रांति पर सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं इस समय सूर्य की किरणें औषधि का काम करती है, मकर संक्रांति के पावन दिन पर दिन बडे और रात छोटी होने लगती है, इसकी शुरुआत 25 दिसंबर से हो जाती है लेकिन मकर संक्रांति में सही क्रम बदल जाता है, माना जाता है कि मकर संक्रांति से ठंडकम होने लगती है। 


मकर संक्रांति पर क्या करना शुभ है :

1. पवित्र नदी में स्नान : मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है, साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है, गंगा स्नान मकर संक्रांति के दिन सबसे ज्यादा उत्तम माना जाता है, आप आपके घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हो और इस दिन को पवित्र बना सकते हो।

 

2. सूर्यदेव को अर्घ्य : मकर संक्रांति पर सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर चलते हैं, ऐसे में सूर्य के उत्तरायण होने पर इनकी पूजा पाठ का महत्व बढ़ जाता है, जिसमें उन्हें अर्ध्य देना पूजा का ही एक अंग है पूजा के बाद जल में कुमकुम, काले तिल डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दे जिससे भगवान सूर्य की कृपा से वैभव यश और बल की प्राप्ति होती है।

 

3. मकर संक्रांति पर करें दान : मकर संक्रांति पर दान का बहुत बड़ा महत्व है, शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति पर किया गया दान सीधे भगवान को समर्पित होता है, ऐसे में मकर संक्रांति पर ब्राह्मणों गरीब व जरूरतमंदों को दान करना जरूर चाहिए।  


4. मकर संक्रांति के अवसर पर गंगा स्नान : गंगा तट पर दान और स्नान का अत्यंत महत्त्व माना गया है, इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग ओर गंगासागर में स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है, सूर्य सभी राशियों को प्रभावित करता है किंतु मुख्यता है यह कर्क व मकर राशियों में अत्यंत फलदायक होता है। 

हमारे वेद भागवत गीता कथा पूर्ण परमात्मा का संविधान यह कहता है कि हम पूर्ण संत से नाम दीक्षा लेकर एक पूर्ण परमात्मा की भक्ति करें तो वह धरती को स्वर्ग बना देंगे और आप की इच्छा को पूरा करेगा। 


मकर संक्रांति पर क्या ना करें :

1. स्नान के पहले कुछ भी ना खाएं मकर संक्रांति के दिन गंगा या किसी अन्य नदी में स्नान और दान करके ही कुछ खाना चाहिए, यदि आपके आसपास कोई नदी नहीं है तो आप घर पर ही नहा कर कुछ दान करें जो आपसे बन सके उसके बाद ही कुछ भी खाए पिए, क्योंकि इसकी पूजा और कुछ नियमों का विशेष ध्यान रखना होता है क्योंकि इस दिन सूर्य भगवान उत्तरायण में प्रवेश करते हैं। 

2. शास्त्र के अनुसार मकर संक्रांति के दिन किसी भी तरह नशे और तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए, इस दिन खिचड़ी मूंग की दाल की खिचड़ी का सेवन अच्छा माना जाता है। 


मकर संक्रांति के बाद से बदलता है वातावरण :

मकर संक्रांति के बाद से वातावरण में बदलाव होना शुरू हो जाता है, वाष्पन की प्रक्रिया शुरू होने लगती है, इससे कई सारी बीमारियां दूर हो जाती है, वैज्ञानिकों के मुताबिक सूर्य के उत्तरायण होने से सूर्य का ताप सर्दी को कम करते रहता है। 


क्या है मकर संक्रांति की पौराणिक कथा :

इस पर्व को मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएं और वैज्ञानिक कारण है इनमें से सबसे प्रसिद्ध पौराणिक कथा मां गंगा, राजा भगीरथ और राजा सगर के पुत्रों से जुड़ी है, कथा के अनुसार कपिल मुनि पर सगर के घोड़े चोरी करने का आरोप लगाया था। 

जिससे क्रोधित होकर कपिल मुनि राजा सगर के साठ हजार पुत्रों को श्राप दे दिया और वह जलकर भस्म हो गए जब इस बात की जानकारी राजा सगर को हुई तो उन्होंने कपिल मुनि से क्षमा मांगी उनकी क्षमा याचना पर कपिल मुनि ने उन्हें एक उपाय सुझाया कि आपको मां गंगा को कैसे भी करके बढ़ती पर लाना होगा।  

उसके लिए राजा सगर के पोते अंशुमान और उनके  राजा ने  भागीरथ की कड़ी तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर गंगा जी ने सगर राजा को दर्शन दिए तब सगर राजा ने कपिल मुनि के आश्रम तक आने का अनुरोध किया, जिसके बाद में गंगा ने सगर पुत्र को मोक्ष प्रदान किया कथा के अनुसार जिस दिन राजा सगर के साठ हजार पुत्रों को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी उस दिन मकर संक्रांति थी, और तभी से मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। 


QNA :

1. एक साल में कितनी संक्रांति होती है?

उत्तर : हिन्दू पंचांग के अनुसार कहे तो एक साल मे 12 संक्रांति होती है लेकिन इनमे से सबसे महत्वपूर्ण मकर संक्रांति होती है। 

2. मकर संक्रांति पर हमें कौन सा रंग नहीं पहनना चाहिए?

उत्तर : काला रंग, या कोई भी ऐसा रैंक जो अशुभ कार्य का संकेत हो। 

3. क्या हम संक्रांति पर नॉन वेज खा सकते हैं?

उत्तर : मकर संक्रांति के दिन प्याज, लहशून, ओर मांस का सेवन नहीं करना चाहिए। 

4. मकर संक्रांति कब हैं?

उत्तर : हिन्दू पंचांग के अनूसार 2023 मे मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जानी है।  

5. संक्रांति शुभ दिन है?

उत्तर :  15 जनवरी दिन रविवार । 

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